अपेंडिक्स का इलाज लक्षण और दर्द के 5 आसान घरेलू नुस्खे

अपेंडिक्स के लक्षण और इलाज : अपेंडिक्स हमारे पेट के निचले तरह दायिने तरफ में होती हैं ये एक ट्यूब के आकर की होती है जिसका लम्बाई लगभग 4  इंच होती हैं। इससे देसी भाषा में छोटी अंत भी कहते हैं। अपेंडिक्स में जब किसी रुकावट या इन्फेक्शन की वजह से सूजन आ जाती है उस अवस्था को अप्पेन्डसिटिस (Appendicitis) कहते हैं। अप्पेन्डसिटिस जानलेवा हो सकती है इसलिए इसको बिलकुल भी हलके में नहीं लिया जाना चाहिए। अप्पेन्डसिटिस होने पर पेट में तेज़ दर्द होता हैं। ज्यादातर मामलो में अपेंडिक्स का इलाज ऑपरेशन ही होता हैं जिसमे सर्जरी के दवारा अपेंडिक्स को बाहर निकाल  दिया जाता हैं। चलिए आज जानते है कुछ अपेंडिक्स के ट्रीटमेंट के घरेलू नुस्खे

अपेंडिक्स आंत का ही एक हिस्सा होता हैं जो बड़ी आंत को छोटी आंत से जोडती हैं। ये समस्या वी तो किसी भी उम्र की लोगो को हो सकती हैं पर 10 से 30 साल की उम्र में अपेंडिक्स होने की ज्यादा संभावना होती हैं। महिलो के मुकाबले पुरुषो को ये ज्यादा होती हैं।

हमारे शरीर में अपेंडिक्स का असल काम क्या हैं इसके बारे में पक्के तौर पर आज तक कोई नहीं बता पाया। इसके बिना भी हमारी बॉडी अच्छे से काम कर सकती हैं। इसलिए जब कभी ये समस्या आती हैं तो अपेंडिक्स को ऑपरेशन से बाहर निकलना ही उचित समझा जाता हैं। क्योंकि अगर इन्फेक्शन बढ़ने पर अपेंडिक्स फैट जाए तो इसमें पीड़ित की जान भी जा सकती हैं। हालाँकि कुछ एक्सपर्ट मानते है का हमारी पाचन क्रिया में योगदान रहता हैं उसमे ये सेल्यूलोस यानि रेशो को पचाने में मदद करती हैं।

अपेंडिक्स / अप्पेन्डसिटिस होने के लक्षण

  • पूरे पेट में तेज़ असहनीय दर्द उठता हैं।
  • बाद में ये दर्द पेट के दायिने हिस्से में चला जाता हैं जहा अपेंडिक्स होती हैं।
  • दस्त और उलटिया लगती हैं।
  • पेट में सूजन आ जाती हैं जो दायिने और ज्यादा होती हैं।
  • मॉल त्यागने के बाद राहत महसूस होती हैं।
  • बुखार चढ़ जाना
  • भूख लगनी बंद हो जाना
  • पेट से गैस आसानी से बाहर ना निकल पाना

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अपेंडिक्स का इलाज और दर्द के घरेलू उपाय

अपेंडिक्स का इलाज और दर्द के घरेलू उपाय

जब भी कभी आपके पेट में तेज़ दर्द हो रहा हो तो उसे बिलकुल भी नज़रंदाज़ मत करे वो अपेंडिक्स का दर्द भी हो सकता हैं। पेट में दर्द के साथ उपर दिए अपेंडिक्स के लक्षण भी दिखाई दे तो तुरंत किसी अच्छे हॉस्पिटल में जाए। अप्पेन्डसिटिस का पता लगाने के लिए अल्ट्रासाउंड टेस्ट और CT Scan किया जाता हैं। उसके आधार पर आगे का ट्रीटमेंट चालू किया जाता हैं।

अप्पेन्डसिटिस का इलाज अगर समय पर नहीं किया जाते तो अपेंडिक्स फट सकती है जो काफी खतरनाक साबित हो सकता हैं। इसलिए डॉक्टर द्वारा निर्धारित समय पर उपचार बहुत जरुरी हैं। अधिकतर केसों में ऑपरेशन ही इसका अंतिम उपाय होता हैं। सर्जरी से अपेंडिक्स के इलाज की प्रक्रिया को appendectomy कहते हैं। अगर इन्फेक्शन कम है तो कुछ Heavy Antibiotics और खान में कुछ परहेज़ की मदद से भी इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता हैं।

उसके साथ में निचे बताए गए कुछ घरेलू नुस्खे की मदद से अपेंडिक्स के कुछ लक्षणों में राहत मिल सकती हैं। पर आप अपेंडिक्स के इलाज के लिए पूरी तरह इन घरेलू उपाय पर भरोसा नहीं कर सकते।

1. अरण्डी का तेल

Appendicitis के इलाज के लिए आरंडी का तेल एक असरदार घरेलू नुस्खा हैं। आंतो में रुकावट अपेंडिक्स में इन्फेक्शन बनने का एक प्रमुख कारण होता हैं। आरंडी का तेल यानी कैस्टर आयल आंतो में हुई रुकावट को खोलता हैं। इसके साथ में इसके सेवन से कब्ज़ के इलाज में भी मदद मिलती हैं जो इस परेशानी की दूसरी एक और वजह होती हैं।

  • एक साफ़ तौलिया ले और उसकी 2 तह बनाए। अब इस तैलीय पर 2 चमच्च आरंडी का तेल डाले। अब निचे एक कपडा बिछाकर उस पर लेट जाए और कुछ समय तक पेट पर वो अरण्डी के तेल वाला तौलिया रखे। ये नुस्खा दिन में 3 बार 2-3 महीने तक लगातार करे।

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2. मेथी के बीज

मेथी के बीजो को अप्पेन्डसिटिस के घरेलू उपचार के लिए एक अच्छा उपाय माना जाता हैं।  इस रेमेडी के सेवन से आंतो में रुकावट नहीं बनती और अगर पहले रुकावट है तो वो खुलने में मदद मिलती हैं। जिससे इससे पेशानी से पहले से बचाव भी हो जाता हैं।

  • एक कप पानी में 2 चमच्च मेथी के बीज डालकर उन्हें उबाले और फिर 10-15 मन्थ धीमी आंच पर पकाए। अब इसे थोड़े देर के लिए ठंडा होने के लिए रख से और फिर इसका सेवन करे।

3. अदरक

अपेंडिक्स में इन्फेक्शन जब होता है तो उसमे सूजन आ जाती हैं। और आरंडी के तेल में कई ऐसे गुण होते है जो ऐसे सूजन को कम करने में मददगार होते हैं। इसके अलावा अपेंडिक्स में होने वाले तेज़ दर्द और उलटिया रोकने में भी अदरक काफी फायदेमंद होता हैं।

  • इस होम रेमेडी को करना बहुत आसान हैं। बस आपको दिन में 2-3 बार अदरक की चाय पीनी हैं। उसके साथ में अदरक के तेल से पेट की हलके हाथो से मसाज़ करनी हैं।

4. तुलसी

इस बुखार काफी होता हैं और तुलसी का सेवन कम तापमान वाले बुखार को ठीक करने में मदद करता हैं। इसके अलावा तुलसी हमारे हाजमे को ठीक करती हैं जिससे अपेंडिक्स के दौरान पेट की गैस से छुटकारा मिल जाता हैं।

  • एक गिलास पानी में कुछ तुलसी की पत्तिया और कटा हुआ अदरक डालकर उबाले। इसे तब तक उबालो जब तक ये आधा ना रह जाए। अब ये हर्बल तुलसी की चाय तैयार हो जायगी। इसमें थोडा शहद मिलकर पिए।

5. फाइबर डाइट

लम्बे समय तक कब्ज़ बने रहना अपेंडिक्स में इन्फेक्शन होने का बड़ा कारण हैं। और कब्ज़ के इलाज के लिए फाइबर युक्त डाइट काफी सहायक होती हैं। सन 2000 में की गयी एक स्टडी से ये पता चला हैं जो कम फाइबर डाइट लेते हैं उन्हें अपेंडिक्स होने का सबसे ज्यादा खतरा होता हैं।

  • मटर, खीरा, चुकंदर, गाजर, सूरजमुखी बीज, टमाटर और हरी सब्जियों में फाइबर काफी होता हैं। इन सब खानों को अपनी डाइट में शामिल करे।

अप्पेन्डसिटिस से बचने के लिए तले हुए मसालेदार खानों और फ़ास्ट फ़ूड से परहेज़ करे। अगर किसी को कभी पेट के दायिने तरफ तेज़ दर्द हो तो बिना देर किसी डॉक्टर से जांच कराए और अगर वो अपेंडिक्स का दर्द है तो तुरंत उसका इलाज चालू करे।

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